Saturday, 13 September 2014

हिमाचल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं लेकिन ज़िम्मेवार कौन




बात दोषारोपण की नहीं ज़िम्मेवारी की है
इस वक़्त हिमाचल में सरकार कांग्रेस की है , हिमाचल में कांग्रेस की सरकार को बने लगभग दो वर्ष हो रहे हैं और इस वक़्त मौजूदा सरकार के परिवहन ,खाद्य -आपूर्ति एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री जी एस बाली का ये वक्तव्य की हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है लेकिन ज़िम्मेवारी किसकी है आर्थिक स्थिति सुधारने की !  मौजूदा सरकार का कमजोर आर्थिक स्थिति के लिए पिछली भाजपा सरकार के सिर पर ठीकरा फोड़ना सिर्फ अपनी जिम्मेवारियों से पल्ला झाड़ने जैसा लगता है

जबकि वीरभद्र सिंह छठी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं और जगजाहिर है की प्रदेश पर सबसे ज्यादा बार शासन कांग्रेस ने ही किया है

सबसे दुखद पहलू यह है कि प्रदेश की जनता सब मालूम होने के बावजूद सिर्फ  खुद को असहाय महसूस करते हुए नेताओं पर निर्भर रहने की मानसिकता से ग्रसित इनके  बनाए सरकारी  झुन्झुनो से दिल बहलाती रहती है और हमारे नुमाइंदे हमें उतना ही  देते हैं जितने से हम  ज़िंदा तो रह सकते हैं लेकिन ज़ी नहीं सकते मिसाल के तौर पर चाहे वो बेरोजगार भत्ता हो , विधवा पेंशन , वृद्धावस्था पेंशन , सामाजिक   सुरक्षा   पेंशन  या कौशल विकास भत्ता आदि योजनाएं हों  आज के महंगाई के दौर में कितनी  की वाज़िब और माकूल  हैं सब जानते   हैं हमारे नुमायन्दे चाहे वो कांग्रेस के हों या भाजपा के मंशा सबकी स्वयं खुद को सम्प्पन करना होता है अगर हमारे नुमायन्दो को मिलने वाली सुख सुविधाओं और भत्तों आदि पर नज़र डाली  जाए तो आम आदमी इनके सामने और भी अदना नज़र  आता है अगर वाकई में इनको आम जनमानस की फ़िक्र होती जैसा कि यह अक्सर कहते हैं तो दो साल जब नयी सरकार बनी थी तो ये अपनी तनख्वाहें आदि ना बढ़ाते
पांच साल   के लिए हम जिन्हें चुनते हैं  वो हमें यकीन दिलाते हैं की वो हमारे अधिकारों ,हितों को प्राथमिकता देंगे लेकिन सबसे पहले वो अपने हितों और अधिकारों को प्राथमिकता देते हैं और कुछ समय बाद ब्यान देते हैं कि प्रदेश की  आर्थिक स्थिति चिंताजनक है

वित्तीय  मामलों पर सरकार लेगी जनता  की  राय रिसोर्स मोबिलाइज़ेशन कमेटी की बैठक में फैसला
खर्चों में नियंत्रण के लिए नए वाहनो की खरीद पर 31मार्च 2015 तक प्रतिबन्ध लगाने का फैसला लिया गया कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव इ-मेल पर या पत्राचार से प्रधान सचिव वित्त के नाम पर भेज सकता है लेकिन यहाँ तक वाहनो की बात है जब नयी सरकार बनी उस वक़्त समस्त मंत्रियो को बाईस लाख की कैमरी कारें दी गयी और और दो मंत्रियों को चालीस लाख की फ़ॉर्चूनर गाड़ियां दी गयी , नेता किसके जनता के और  पैसा किसका वो भी  जनता का ,

अगर जनता की राय सरकार  इस वक़्त  मांग ही रही है  चाहे जगदिखाई के लिए ही सही तो कम से कम ये राय देना चाहूंगा सरकार को जैसा की मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने निर्णय लिया है कि अगली बैठक के दौरान सचिवों और राजस्व , खनन , वन एवं पर्यटन विभागाध्यक्षों के साथ गैर कर संसाधनो के सृजन के सम्बन्ध में चर्चा की जायेगी तथा  जल विद्युत  परियोजनाओं के निष्पादन में तेज़ी लाई जाएगी  तो   इस  बाबत  इतना कहना चाहूंगा की क्या सरकार को मौजूदा पर्यावरण की दुर्दशा देख के अभी भी  लगता है   की हिमाचल  खनन , सीमेंट उद्योगों और  विद्युत  परियोजनाओं के लायक बचा है दूसरा सरकारी विभागों   के पास उपलब्ध भूमि को चिन्हित कर अतिरिक्त भूमि को 99 साल  के लिए पट्टे  पर दिया जाएगा जो   कि यकीनन बाहर के लोगों को धारा एक सौ अठारह में फेरबदल या बिना फेरबदल के दिया जाएगा और कहा जायेगा की प्रदेश   के  लोगों  को रोजगार  मिलेगा लेकिन सरकार से पूछना  चाहूंगा कि जैसा कि हिमाचल में जो भी बिजली प्रोजेक्ट लगे हैं उनमें हिमाचलियों को रोजगार कहाँ  है  चम्बा से लेकर बड़ा भंगाल तक जितने भी बिजली प्रोजेक्ट लगे हैं लगभग सब में मैं स्वंय गया हूँ और देखा है कि वहां पर जो मजदूर काम करते हैं ज्यादातर डोडा के खान होते हैं!
और जो बाबू टाइप या इंजीनियर टाइप कर्मचारी होते हैं हैदराबाद आदि जगहों से होते हैं
तो अपने पहाड़ों   को छलनी करवा के भी हिमाचलियों को रोज़गार नहीं है
बात रोजगार की नहीं सुरक्षित जीवन जीने की   है  जो   कि खनन , पहाड़ों को खोखला कर बिजली प्रोजेक्ट , सीमेंट उद्योग लगा कर चंद पैसों के लिए  प्रकृति   को तहस नहस  किसी भी तरह संभव नहीं है  !


जनता का छोटे- छोटे प्रलोभनों  के  प्रति आकर्षण जनता को मूर्ख एवं अंधा बना   देता है जबकि जनता भली भांति  जानती  है की कौन -कौन विधायक पहले से सम्प्पन था और कौन कौन चुनाव जीतने के बाद खूब पैसे वाला हो गया  ...